11/2/09

चित्त को शांत करें।

लेखक: शम्भु चौधरी


"जीवन ऊर्जा" के स्त्रोत का पता लगाने के लिये हमलोग श्री अर्जुन और श्री कृष्ण के उस संवाद पर चर्चा कर रहे थे, जहाँ श्री अर्जुन के भ्रम, स्नेह, अपनत्व ने अपनी शक्ति को कमजोर कर उसे निराशाजनक-कमजोर करने का प्रयत्न कर दिया, ऐसे समय में श्री कृष्ण के संदेश ने उनके इस भ्रम, स्नेह और अपनत्व को समाप्त कर यह बताया कि "तुम जो देख रहे हो वो और जो सोच रहे वह सिर्फ एक माया है" और श्री अर्जुन के अन्दर नई ऊर्जा का संचार किया। ये ऊर्जा अचानक से कहाँ से पैदा हुई इसी बात का अध्ययन हमें यहाँ करना है। ऊर्जा कैसे पैदा होती है।

  • 1.प्रशंसा करने से
  • 2.मान देने से
  • 3.स्वचिंतन से
  • 4.चिंता न करने एवं
  • 5.चित्त को शांत रखने से


  • 1. प्रशंसा करना:

    हम यह बात जानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति हमारी प्रशंसा करता हो तो हमें न सिर्फ सुनने में ही अच्छा लगता है, वरन वह व्यक्ति भी हमेशा याद रहता है और जिस कार्य को करने पर उस व्यक्ति ने प्रशंसा की वैसे या अन्य कार्य को करने की मन में और भी तमन्ना बनी रहती है। अर्थात ऊर्जा का संचार बना रहता है। यही कार्य जब हम किसी बच्चे के द्वारा बनाये कला-कृति को पुरस्कृत करते हैं तो उस बच्चे में जो ऊर्जा का संचार होता है वह उसे चित्रकार, कवि, लेखक, साहित्यकार, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक आदि बना देता है। किसी समय दिया हुआ एक छोटा से स्नेह, प्यार या प्रशंसा के दो शब्द उसके जीवन को बदल सकता है। ऊपर जायें


  • 2. मान देना:

    किसी को मान देना भी संबंधित व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा का संचार करना ही है। हम और आप दैनिक जीवन में जब कोई कार्य करते हैं तो कई बार ऐसा भी होता है कि किसी बच्चे या अपने से बड़े के कार्य में हो रही गलती के लिये उसे या तो टोकते ही नहीं या फिर टोकते हैं तो इतना टोकने लगते हैं कि उसके अन्दर कार्य करने की क्षमता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। यही कार्य बच्चों को समझा कर या बड़े को मान देते हुए भी उन्हें बता सकते हैं। इससे उसमें न सिर्फ अपनी गलती को समझने की क्षमता का विकास होगा। नये कार्य करने की क्षमता भी विकसित होती है। अर्थात अपनी बोलने की कला से ही हम नई ऊर्जा को उत्पन्न कर सकतें हैं। ऊपर जायें


  • 3. स्वचिंतन से:

    स्वचिंतन की कला एक साधारण कला है इसे हर कोई अपना सकता है। हम प्रायः/अकसर यह कहते पाये जाते हैं कि "टाइम(समय) नहीं है- कल बात करना या कल आना" कोई कुछ माँगने आ गया तो उसे एक-दो बार बिना लौटाये तो उसका जबाब ही नहीं देना। ऐसा घटना हम सबके जीवन में आम बात है। इसे ऐसे भी कहा जा सकता कि हममें आदत सी हो गई है कि किसी काम को कल पर टाल देना। इसी कार्य को हम यदि समय को नियमित कर लें किसी भी व्यक्ति के कार्य को टालने की वजह उसका कार्य कर दें या समय निश्चित कर उस कार्य को पूरा कर लें तो न सिर्फ दोनों व्यक्ति का काम बन जायेगा, समय भी दोनों का अन्य कार्य करने के लिये बचा रह जायेगा, जिसे अन्य किसी जरूरी कार्य में उपयोग कर सकगें। इस तरह के स्वचिंतन से जो ऊर्जा अत्पन्न होती है वह स्थाई होती है और इससे खुद को काफी संतोष भी मिलता है। ऊपर जायें


  • 4. चिंता करना:

    प्रायः हम उस बात की चिंता करने लगते हैं जो गुजर चुका है या अभी आया ही नही। अर्थात वर्तमान को कल की बात के लिये या भविष्य में होने वाले घटनाक्रम के लिये अभी से चिंतित होकर अपने वर्तमान को नष्ट कर देते हैं। कुछ लोग चिंता में समय गुजार देते हैं कुछ लोग चिंतित होकर उस अंधेर गुफा में खो जाते हैं। यह क्रिया हमारे जीवन की ऊर्जा को नष्ट करने का कार्य करती है। ऊपर जायें


  • 5.चित्त को शांत रखना:

    कई बार हम बेवजह ही परेशान होते रहतें है, इस बेवजह परेशानी का कोई कारण नहीं होता, यदि होता भी है तो हम उसे तत्काल समाप्त नहीं कर सकते। जैसे रात को सोते वक्त यदि इस परेशानी को चाहकर भी दूर नहीं किया जा सकता, फिर भी हम रात को करवटें बदलतें रहतें हैं। इस करवट के बदलने से रात को निद्रा भी नहीं आती और मस्तिष्क में तनाव बना रहता है। यह क्रम कभी किसी बात को लेकर या कभी किसी बात को लेकर क्रमशः ही चलता रहता है नतीजतन नींद की गोली लेनी पड़ जाती है, तनाव कभी कम तो कभी अधिक होता रहता है। इस तनाव को हम अपने चित्त को शांत कर, कर सकतें हैं और इसमें जो ऊर्जा की बचत होगी उसे हम किसी अन्य कार्य में उपयोग कर सकतें है। जब आप सोने जायें तो दिमाग को अपने विस्तर के नीचे रखकर सो जाईये यह बात मैं अकसर अपने मित्रों को भी कहता हूँ, एक बार मेरी पत्नी को भी यही बात कही तो बोलने लगी बस आपको क्या? सुबह मुझे ही तो जल्दी उठना पड़ता है, बच्चे की स्कूल 7.00 बजे से होती है, आप तो 7 बजे उठते ही हो।
    मैंने पुछा- "इससे उठने का क्या संबंध" मैं तो सिर्फ सोने को कह रहा हूँ, अभी मस्तिष्क को, चित्त को,शांत कर के सो जाओगी तो सुबह तुम ही अपने आपको फ्रेश महसूस करोगी। एकबार कर के तो देखो।
    उसने पुछा- "कि ये दिमाग को तकिये के नीचे कैसे रखा जायेगा।"
    मैंने उसे समझाया - "बस बिलकुल साधारण सी बात है। बिस्तर पर जब सोने जाओ तो सारी दुनियादारी की बात को भूल जाओ और ईश्वर से प्रार्थना करो कि आज जो गुजर चुका है, उसमें कहीं भूल हुई हो तो क्षमा करना और कल जो आने वाला है सबके लिये अच्छा हो।" बस इतनी बात याद करनी है और सो जाना है। क्रमशः


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  • 12 टिप्‍पणियां:

    1. दिमाग बिस्तर के नीचे क्या बात है-वाह
      श्यामसखा ‘श्याम,
      -मेरे ब्लॉग-http:// gazal k bahane.blogspot.com
      v batan ri bat पर आपका स्वागत है

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    2. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं,

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    3. Aapka shubhkamnayon sahit swagat hai...Maine Vipashyana saadhnaa vidhee ko atyant shashtr shuddh paaya. Ek aisee saaddhana paddhatee , jo "adhyatm" kaa prayog kaise kiyaa jay ye sikhaatee hai, khudke anubhav se( koyi kathit yaa kitaabee gyaan nahee)...iseeko "pragya" kaha gaya hai.
      Adhyatmakaa sandhi vichhed hai: Adhi(adhyayan)+aatman(swayam....aatmaa nahee). Is vidheeme kisee atmaa yaa parmaatmaake darshanka wada nahee...keval khudko dekhna...satyake aadharpe...har kshankee sachhaee, "aary maun" ke saath.
      Bharatkee ye atyant pracheen saadhnaa vidhi hai. Jo "rut" ko samajh paataa hai(rut=nisarg ke niyam) wo "rushee"( shatragya) kehlaataa hai.
      snehsahit
      Shama

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    4. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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    5. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपके इस चिट्ठे का भी हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

      एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

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    6. वर्ड वेरीफिकेशन वाले निवेदन को नजर अंदाज कर दें, भूलवश हो गया है. :)

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    7. शम्भु जी आपकी कोशिश अच्छी है
      हमारी शुभकामनायें

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    8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    9. ब्लॉग जगत में आपके शुभ आगमन पर हार्दिक बधाई .............

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    10. लेख पढकर अच्छा लगा । अब दिमाग को रोज़ तकिए के नीचे रखने का प्रयास किया जाएगा ।
      भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
      लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
      कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
      मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
      www.zindagilive08.blogspot.com
      आर्ट के लि‌ए देखें
      www.chitrasansar.blogspot.com

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    11. बहुत अच्छा लेख लिखा है।अच्छे विचार प्रेषित किए हैं। धन्यवाद।

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